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भारत के स्वास्थ्य, सामाजिक व आर्थिक विकास हेतु ''हर्बल इण्डस्ट्री कमीशन`` की महति आवश्यक
Reg.No. 829/1992-93
Under Society Reg.
Act.No.-21,1860
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Ph. 0542-2366566 Fax 0542-2366566
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भारत के स्वास्थ्य, सामाजिक व आर्थिक विकास हेतु "हर्बल इण्डस्ट्री कमीशन" की महति आवश्यकता
आवश्यक तथ्य :
- योजना आयोग, भारत सरकार के सूचना के अनुसार भारत के आर्थिक विकास हेतु हर्बल इण्डस्ट्री के जरूरत को महसूस किया जाना।
- योजना आयोग, भारत सरकार के सूचना के अनुसार जड़ी-बूटियों पर आधारित उद्योग का मात्र वैश्विक बाज़ार में मात्र 2% की हिस्सेदारी है।
- भारत राष्ट्र जड़ी-बूटियों पर आधारित ज्ञान का विश्वगुरु है।
- योजना आयोग भारत सरकार के सूचना के अनुसार जड़ी-बूटी उद्योग का वैश्विक बाज़ार 60 बिलियन US$ है जो 7 - 12% वार्षिक वृद्धि दर से विकास कर रहा है और 2050 तक 5 ट्रिलियन US$ हो जाएगा।
- उत्तरी अमरीका में NGO द्वारा भी उपर के बिन्दू का समर्थन करना।
- एलोपैथिक औषधियों के जहरीले कुप्रभाव से उत्तरी अमरीका में लगभग 3,50,000 नागरिक अस्पताल में भर्ती होते हैं एवं 1,06000 व्यक्ति काल-कवलित होते हैं।
- भारत देश के जड़ी-बूटी उद्योगों, विपणन, विज्ञान व तकनीकी विषय आधारित (डिप्लोमा अथवा स्नातक विषय का न पढ़ाया जाना जबकि AICTE द्वारा अनेकों विषयों पर डिप्लोमा कोर्स चल रहे हैं ।
- वनस्पति आधारित उत्पाद अन्य देशों में ड्रग कास्मेटिक एक्ट में नहीं आते जबकि भारत में औषधि श्रेणी में आते हैं।
- जड़ी बूटी उद्योग हेतु कच्चे माल वनस्पति (हर्बल) आधारित होते हैं जो गाँव,जंगल व पहाड़ों पर मिलते हैं जहाँ ग्रामीण, कृषक, पिछड़ी जन-जाति, पिछड़ी जाति व आर्थिक रूप से पिछड़े लोग निवास करते हैं।
- आयुर्वेद चिकित्सापद्धति को विश्व स्तर पर स्थापित करना एक विषय है और जड़ी-बूटियाँ आधारित उत्पादनों के भारी वैश्विक बाज़ार पर कब्ज़ा करना दूसरा विषय है। वैश्विक बाज़ार में जड़ी-बूटी आधारित उत्पादों को फूडसप्लीमेन्ट, आहार द्रव्य, हेल्थ प्रोडक्ट, न्यूट्रास्युटिकल या फंक्शनल फूड कहते हैं न कि औषधि, एवं इनके उद्योग, उद्योग मंत्रालय के नियमों से संचालित होते हैं न कि स्वास्थ्य मंत्रालय से।
- रिलायन्स उद्योग समूह का कुल बिक्री 19.9 बिलियन US$ है एवं ओ.एन.जी.सी. के पिछले चार वर्षों का टर्न ओवर 15 बिलियन US$ है।
रूकावटे-
- वनस्पति जड़ी-बूटी उद्योगों में शिक्षा, ज्ञान, विज्ञान व तकनीक का कम प्रयोग होना।
- वनस्पति जड़ी-बूटी उद्योग सम्बन्धित उप-उद्योगों द्वारा सम्मिलित प्रयास का न होना।
- वनस्पति औषधीय जड़ी-बूटी निर्माण, संकलन व खेती का मानकों के अनुरूप न होना।
- वनस्पति औषधियों को शुद्ध, सुरक्षित व प्रभावी प्रामाणिक होना।
- औषधियों के जीवन उपयोगी ज्ञान व आधुनिक माध्यमों से गुणों का प्रचार व प्रसार।
- जड़ी-बूटी उद्योग आधारित विषय पर शिक्षण कार्य का अपर्याप्त होना।
- वनस्पति उद्योग सम्बन्धित शोधपरक शैक्षणिक विषयों का पठन-पाठन न होना।
- जड़ी-बूटी उद्योगों का वैश्विक बाज़ार हेतु स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा संचालन व औषधि श्रेणी में होना वैश्विक बाज़ार में रूकावटें व बाधा प्रदान करते हैं।
आवश्यकतायें-
- ग्रामवासियों, कृषकों, अनुसूचित व पिछड़ी जन-जातियों व गरीबों को जड़ी-बूटियों के गुण ज्ञान को बताना व औषधियों का संकलन एवं खेती करना व इस कार्य में स्वास्थ्य, शिक्षा, वन, कृषि एवं जिला प्रशासन का सम्मिलित प्रयास।
- जड़ी बूटियों का विज्ञान व तकनीकी द्वारा परिष्करण व रख-रखाव।
- जड़ी-बूटियों का ट्रान्सपोर्टेशन (वितरण)।
- जड़ी-बूटियों पर आधारित औषधियों का निर्माण व दक्ष मानकीकरण प्रमाणिकता करने हेतु प्रयोगशालाओं की स्थापना।
- वैज्ञानिक शोध व विकास करना।
- औषधियों को शुद्ध, सुरक्षित व प्रभावी होने हेतु वैज्ञानिक एवं तकनीकी शोध एवं मानकीकरण।
- जड़ी-बूटी आधारित उत्पादनों का वैश्विक बाज़ार में विज्ञान तकनीकी आधारित ज्ञान व सुरक्षित गुणों का प्रचार-प्रसार हेतु वैज्ञानिक गोष्ठियों का आयोजन, प्रिन्ट व इलेक्ट्रानिक मिडिया एवं विदेश स्थित भारतीय दूतावासों का सम्मिलित प्रयास कराना।
- आधुनिक तकनीकी द्वारा वैश्विक बाज़ार में जड़ी-बूटी आधारित उत्पादनों का प्रचार-प्रसार व विपणन करना।
- शैक्षणिक विषयों का AICTE द्वारा डिप्लोमा व बी-टेक कोर्स स्थापित करना।
- उद्योग मंत्रालय द्वारा संचालन व प्रचार-प्रसार।
- हर्बल इण्डस्ट्री बोर्ड अथवा कमीशन का गठन करना।
जड़ी-बूटी आधारित उद्योग के लाभ निम्नांकित हैं -
१. सर्वांगीण ग्रामीण विकास।
२. स्वास्थ्य सुधार।
३. औद्योगीकरण।
४. रोजगार उपलब्धता।
५. स्वदेशी व्यापार उन्नति।
६. निर्यात।
७. पेटेन्ट कानून लागू होने पर विश्व-बाजार।
८. पहाड़ी, ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में रोजगार की सम्भावनायें।
९. गो-रक्षा एवं गो-सेवा-पंचगव्य का औषधि निर्माण में प्रयोग।
१०. औषधियों की खेती-कृषकों के आय का बेहतर स्रोत।
११. भूमि सुधार एवं बंजर भूमि का प्रयोग।
१२. लुप्त होती जड़ी-बूटियों का बचाव।
१३. प्रदूषण से रक्षा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा।
१४. स्वदेशी चिकित्सा-पद्धति की रक्षा
१५. शोध व अनुसंधान की सम्भावनायें।
१६. स्वास्थ्य पर्यटन को बढ़ावा।
१७. बिना कुप्रभाव के प्राकृतिक चिकित्सा व रसायनिक औषधियों का कम खपत व निर्माण मनुष्य को पर्यावरण की सुरक्षा आधुनिक चिकित्सा के प्रयोग से उत्तरी अमेरिका में लगभग 4,00000 लोग प्रभावित होते हैं ।
१८. देश के आर्थिक विकास में कृषको के भागीदारी द्वारा उनका स्वाभिमान का बढ़ाना।
१९. कास्मोस्युटिकल व न्यूट्रास्युटिकल उत्पादों का निर्माण व बढ़ावा।
भवदीय
वाचस्पति त्रिपाठी
B.Pharma.(Hons.), M. Pharma, IT, BHU
S.R.F., U.G.C. (Dept. of Medicinal Chemistry, Faculty of Ayurveda)
S.R.F., U.G.C. (Dept. of Pharmacology, Institute of Medical Sciences)
भैषज वैज्ञानिक व जड़ी-बूटी उद्योग विशेषज्ञ
सदस्य- विशेषज्ञ राष्ट्रीय समिति भारी धातु योग ''आयुर्वेद भष्म'', डिपार्टमेन्ट ऑफ साइन्स एण्ड टेक्नॉलाजी, भारत सरकार
पूर्व सदस्य- ड्रग्स एण्ड फार्मास्युटिकल्स रिसर्च फ्राम नेचुरल प्रोडक्ट्स योजना आयोग, भारत सरकार
महासचिव- एस.एन. त्रिपाठी मेमोरियल फाउण्डेशन, कृष्णाबाग, नगवा, वाराणसी-5
फोन न0- 0542-2366566, 2367855,
Mo 09415225324
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