भारत के गौरव को बढ़ाने हेतु - भारतीय गौरवशाली नागरिक
(Indian Citizen of Prouds) की पहचान हो
- क्यों और कैसे -
द्वारा - डॉ० वाचस्पति त्रिपाठी
भैषज वैज्ञानिक व हर्बल इण्डस्ट्री विशेषज्ञ
भारत के आज के समय में जहाँ लोकतंत्र के नाम पर समाज को ठगा जा रहा है विकास के नाम पर भ्रष्टाचार हो रहा है, चरित्र के नाम पर हॅसा जाता है, जो जीता वही सिकन्दर को सही समझा जा रहा है भले ही वह खेल गलत, बिना नियम के खेला गया हो ऐसे स्थिति में जनता को सही दिशा में चलने की सलाह देना भी एक पागलपन ही होगा। क्योंकि सही व्यक्ति के ऊपर हॅसा जाता है, उसका उपहास होता है यही नहीं कभी-कभी उसे फॅसा भी दिया जाता है। आज सत्य को जीतने में समय ज्यादा लग जाता है। ''सत्यमेव जयते'' में देर हो रही है क्योंकि ये कथ्य इन्सानों के लिए है ''जिसकी लाठी उसकी भैंस'' कथ्य, ज्यादा चरितार्थ है।
क्यों न आज के परिवेश में, हम समाज को सत्य, चरित्र के मार्ग पर चलने के लिए एक उपाय की तलाश करें। यह सत्य है कि देश की बागडोर जिसके हाथ में है, उसे देश को चलाने में ही अपनी सारी ताकत-समय को ढकेल देना पड़ता है। उसके पास सत्ता को कायम रखने से, देश के सामान्य कार्य और विशेष कार्यों हेतु ही समय कम पड़ता है। और शायद हमारे पूर्व भी कई चिन्तकों ने इस विषय पर सोचा होगा, अपने विचार लिखे होंगे, परन्तु क्यों नहीं ऐसी चीज़ें सामने आई, यह एक प्रश्न है, मेरे मन में।
हमारे विचार से समाज को सही दिशा देने के उपाय हेतु तत्काल हमें सुझाव मंगवाने चाहिए और उसका अनुसरण करना चाहिए। ''देर आए दुरूस्त आए'' "Better Late Than Never" कथ्य का ऐसे गम्भीर विषय पर अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।
जहाँ देश में बड़े-बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं अनेक विषयों पर। यदि, इस कार्य हेतु कुछ व्यय भी हो जाए तो इसको अवश्य करना चाहिए। गंगा नदी जैसे पवित्र नदी के लिए आज भी हम प्रयासरत हैं कि इसकी पवित्रता न खराब हो। इसमें स्नान करने से सारे पाप धुल जाते हैं। करोड़ों जनता आज भी इसके पवित्रता से लाभ ले रही हैं, क्योंकि यह पवित्र नदी है। एक पवित्र धारा समाज में भी बहना चाहिए। यदि गंगा रूपी पवित्र सामाजिक धारा का प्रवाह समाज में हम कर पाए तो अवश्य समाज उसमें डुबकी लगाकर, प्रभावित हो कर पवित्रता पा सकेगा।
हमारे विचार से महामहिम राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री द्वारा एक अभियान तुरन्त चलाया जाना चाहिए (पूर्व में हर प्रकार के सम्मानों जैसे पद्मश्री, पद्मभूषण, भारतरत्न, अशोक चक्र आदि के अलावा) जिसके द्वारा हर वर्ष समाज के उन दो सौ व्यक्तियों का चयन होना चाहिए जो देश के लिए गर्व हों जिन्होंने देश का सम्मान विश्व स्तर पर बढ़ाया, जो देश और समाज को कुछ दिए, जिनका उच्च चरित्र हो, जो अनुसरणीय हों, ऐसे महान व्यक्तियों का चयन प्रक्रिया राजनीति से प्रभावित नहीं होना चाहिए। ऐसे व्यक्तियों को समाज में V.I.P. व्यवस्था प्रदान करना चाहिए। 70 वर्ष के उनके आयु तक V.I.P. सुविधा मिलनी चाहिए उन्हें केशरिया/सफेद बत्ती (गाड़ी पर) लगाने की व्यवस्था दी जानी चाहिए, ताकि V.I.P. सुविधा के कारण उन्हें समाज में पहचाना जा सके। समाज देख सके, जान सके, की सही काम करने में भी पहचान मिलता है, जनता में लालसा उत्पन्न हो, सही दिशा में चलने हेतु।
ऐसे व्यक्ति को I.C.P. (Indian Citizen of proud) भा०गौ०ना०(भारतीय गौरवशाली नागरिक) का सांकेतिक चिन्ह मिलना चाहिए। बचपन से युवा अवस्था तक जब छात्र पढ़ने जाता है, या समाज में बच्चे का जब मानसिक विकास होता है तो वह समाज में देखता है क्या बनने में, किस दिशा में उसका सम्मान, उसके परिवार का सम्मान, उसके कुल, देश का सम्मान बढ़ता है अपने परिवेश के आधार पर, उसकी इच्छाओं की पूर्ति होगी, उसका मानसिक विकास उसी दिशा में होने लगता है। यदि वह समाज में I.C.P. जैसे व्यक्तित्व को देखता है V.I.P. व्यवस्था सुविधाओं के साथ तो नििश्चत ही यह वैसा अनुसरण कर सकता है, ताकि वह भी I.C.P. बन सके। I.C.P. से समाज में गंगा जैसी पवित्र नदी प्रवाह करेगी जो हिमालय से चलकर बंगाल की खाड़ी तक पवित्र होती है। I.C.P. जैसा व्यक्ति जिसका व्यक्तित्व ही उसकी निरन्तर पहचान होती है कभी भी अपनी दिशा नहीं खो सकता, वह अपने जीवन में I.C.P. में आदि से अन्त तक जीवनपर्यन्त समाज के लिए एक दिशा दिखाने वाला मिसाल बना रहेगा। जहाँ आज हम I.A.S., I.P.S., I.R.S. पदों पर भ्रष्ट अधिकारियों की सूची बनाने की बात करने लगे हैं। भारत में सौ करोड़ के जनता हेतु, यदि इस कार्य हेतु थोड़ा व्यय भी हो जाय तो भी अवश्य करना चाहिए ताकि पवित्र धारा जल्द से जल्द बह सके। पद्म भूषण, पद्मश्री जैसे मानक उपाधियाँ तो दी जाती हैं वो समाज में निरन्तर नहीं दिखता, उसकी सुविधायें छात्र एवं युवाओं को नहीं दिखती आज के छात्र एवं युवाओं की कुछ ज्यादा लालसा हो गई है और यदि उसकी लालसा सही कार्य हेतु सही दिशा में है तो अवश्य होनी चाहिए और उसमें सरकार को प्रोत्साहन भी देना चाहिए।
I.C.P. के चयन हेतु व्यक्तियों का Biodata & Confidential Reports उपलब्धियों का परीक्षण, उच्च पदस्त, सेवानिवृत्त विभूतियों, के द्वारा चयनित किया जाना चाहिए। इस समिति के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री को होना चाहिए, इस समिति में २० सदस्य पूर्व प्रमुख प्रदेश स्तर के होंगे, २० सदस्य पूर्व न्यायाधीश उच्चन्यायालय प्रदेश स्तर के होंगे, चयन कर्ताओं को कम्प्यूटर के आधार पर गोपनीय ढंग से व्यक्तियों की व्यक्तित्व से सम्बन्धित प्रपत्र प्रदान की जाय, ताकि अभ्यर्थी व्यक्ति अथवा कोई भी यह नहीं जान सके कि उसके प्रपत्र किसके पास है। कहने का मतलब चयन प्रक्रिया एक दम कठिन से कठिन होना चाहिए और हर वर्ष 200 व्यक्तियों का चयन होना चाहिए। इस कार्य हेतु जो भी व्यय हो उसे सरकार को अवश्य करके यह कार्य तुरन्त करना चाहिए।
मुझे विश्वास है कि उपरोक्त विधि से समाज में एक स्वस्थ मानसिकता की नींव रखी जला सकती है जिससे समाज में एक सही दिशा का पता चलेगा। एक सही दिशा में हवा चलेगी और हम सभी उस दिशा में मुड़ने के लिए बाध्य होंगे जिसे सोचकर भी भारत माँ को गर्व होगा। भारत का सम्मान बढ़ेगा। भारत विश्व पर विजय पा सकेगा।
धन्यवाद !
जय भारत !
वाचस्पति त्रिपाठी
महासचिव
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